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ramayan 6.9.20: आप मेरे बड़े भाई हैं। इसलिए मैं विनम्रतापूर्वक आपको प्रसन्न करना चाहता हूँ। कृपया मेरी बात मानिए। मैं आपके हित के लिए आपसे सच कह रहा हूँ - आप सीता को श्री रामचंद्रजी को लौटा दीजिए।   |   ramayan सर्ग 6.9: विभीषण का रावण से श्रीराम की अजेयता बताकर सीता को लौटा देने के लिये अनुरोध करना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  6.9.20 
प्रसादये त्वां बन्धुत्वात् कुरुष्व वचनं मम।
हितं तथ्यं त्वहं ब्रूमि दीयतामस्य मैथिली॥ २०॥
 
 
अनुवाद
आप मेरे बड़े भाई हैं। इसलिए मैं विनम्रतापूर्वक आपको प्रसन्न करना चाहता हूँ। कृपया मेरी बात मानिए। मैं आपके हित के लिए आपसे सच कह रहा हूँ - आप सीता को श्री रामचंद्रजी को लौटा दीजिए।
 
‘You are my elder brother. Therefore, I want to please you humbly. Please listen to me. I am telling you the truth for your benefit – you should return Sita to Shri Ramchandraji.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)