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ramayan 6.89.37: भयंकर मांसभक्षी पशु अपनी वाणी से भयंकर शब्द करने लगे। उस समय न तो वायु चल रही थी और न अग्नि ही जल रही थी। 37॥   |   ramayan सर्ग 6.89: विभीषण का राक्षसों पर प्रहार, उनका वानरयूथ पतियों को प्रोत्साहन देना, लक्ष्मण द्वारा इन्द्रजित के सारथि का और वानरों द्वारा उसके घोड़ों का वध   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 89: विभीषण का राक्षसों पर प्रहार, उनका वानरयूथ पतियों को प्रोत्साहन देना, लक्ष्मण द्वारा इन्द्रजित के सारथि का और वानरों द्वारा उसके घोड़ों का वध  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  6.89.37 
क्रव्यादा दारुणा वाग्भिश्चिक्षिपुर्भीमनि:स्वनान्।
न तदानीं ववौ वायुर्न च जज्वाल पावक:॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
भयंकर मांसभक्षी पशु अपनी वाणी से भयंकर शब्द करने लगे। उस समय न तो वायु चल रही थी और न अग्नि ही जल रही थी। 37॥
 
The fierce carnivorous animals started uttering terrible words through their voices. At that time neither wind was blowing nor fire was burning. 37॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)