Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 6.89.17: मैं इसके पिता का भाई हूँ। अतः यह मेरा पुत्र है। अतः मेरे लिए इसका वध करना अनुचित है, तथापि श्री रामचन्द्रजी के लिए मैं समस्त दया का त्याग करके अपने इस भतीजे का वध करने को तैयार हूँ॥ 17॥ | ramayan सर्ग 6.89: विभीषण का राक्षसों पर प्रहार, उनका वानरयूथ पतियों को प्रोत्साहन देना, लक्ष्मण द्वारा इन्द्रजित के सारथि का और वानरों द्वारा उसके घोड़ों का वध । ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
मैं इसके पिता का भाई हूँ। अतः यह मेरा पुत्र है। अतः मेरे लिए इसका वध करना अनुचित है, तथापि श्री रामचन्द्रजी के लिए मैं समस्त दया का त्याग करके अपने इस भतीजे का वध करने को तैयार हूँ॥ 17॥
I am the brother of his father. Hence he is my son. Hence it is improper for me to kill him, however for the sake of Shri Ramchandraji I am ready to kill this nephew of mine, sacrificing all compassion.॥ 17॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥