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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
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काण्ड 6: युद्ध काण्ड
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सर्ग 88: लक्ष्मण और इन्द्रजित की परस्पर रोषभरी बातचीत और घोर युद्ध
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श्लोक 76
श्लोक
6.88.76
तयोरथ महान् कालो व्यतीयाद् युध्यमानयो:।
न च तौ युद्धवैमुख्यं श्रमं चाप्यभिजग्मतु:॥ ७६॥
अनुवाद
इस प्रकार दोनों ने युद्ध करते हुए बहुत समय व्यतीत कर दिया; किन्तु न तो वे युद्ध से विमुख हुए और न ही उन्हें थकान महसूस हुई।
In this manner both of them spent a lot of time fighting; but neither did they turn away from the battle nor did they feel tired.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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