श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 88: लक्ष्मण और इन्द्रजित की परस्पर रोषभरी बातचीत और घोर युद्ध  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  6.88.29 
अनुक्त्वा परुषं वाक्यं किंचिदप्यनवक्षिपन्।
अविकत्थन् वधिष्यामि त्वां पश्य पुरुषादन॥ २९॥
 
 
अनुवाद
नरभक्षी राक्षस! तुम देखोगे, मैं तुम्हें बिना कुछ कठोर कहे, बिना तुम पर कोई आरोप लगाए और बिना अपनी प्रशंसा किए मार डालूँगा।'
 
Cannibal demon! You will see, I will kill you without saying anything harsh, without making any accusations against you and without praising myself.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)