श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 87: इन्द्रजित और विभीषण की रोषपूर्ण बातचीत  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  6.87.17 
निरनुक्रोशता चेयं यादृशी ते निशाचर।
स्वजनेन त्वया शक्यं पौरुषं रावणानुज॥ १७॥
 
 
अनुवाद
हे रावण के छोटे भाई निशाचर! तुमने लक्ष्मण को यहाँ लाकर और मुझे मरवाने का प्रयत्न करके ऐसी क्रूरता दिखाई है। ऐसा प्रयत्न केवल तुम्हारे जैसा कोई सम्बन्धी ही कर सकता है। तुम्हारे अतिरिक्त किसी अन्य सम्बन्धी के लिए ऐसा करना सम्भव नहीं है।॥17॥
 
O Nishachar, younger brother of Ravana! You have shown such cruelty by bringing Lakshmana to this place and trying to have me killed. Only a relative like you can do such effort. It is not possible for any other relative except you to do this.'॥ 17॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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