श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 87: इन्द्रजित और विभीषण की रोषपूर्ण बातचीत  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  6.87.16 
य: स्वपक्षं परित्यज्य परपक्षं निषेवते।
स स्वपक्षे क्षयं याते पश्चात् तैरेव हन्यते॥ १६॥
 
 
अनुवाद
जो अपना पक्ष छोड़कर दूसरे पक्ष के लोगों का संग करता है, जब उसका अपना पक्ष नष्ट हो जाता है, तब वह पुनः उनके द्वारा मारा जाता है॥16॥
 
He who leaves his own side and indulges in the company of the people of the other side, when his own side is destroyed, is again killed by them.॥ 16॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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