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श्लोक 6.86.9  |
स सम्प्रहारस्तुमुल: संजज्ञे कपिरक्षसाम्।
शब्देन महता लङ्कां नादयन् वै समन्तत:॥ ९॥ |
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| अनुवाद |
| इस प्रकार वानरों और राक्षसों में भयंकर युद्ध होने लगा, जिसके महान् कोलाहल से समस्त लंकापुरी चारों ओर से गूंज उठी। |
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| In this way a fierce battle began between the monkeys and the demons. The entire Lankapuri resounded from all sides with its great noise. |
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