श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 86: वानरों और राक्षसों का युद्ध, हनुमान्जी के द्वारा राक्षस सेना का संहार और उनका इन्द्रजित को द्वन्द्वयुद्ध के लिये ललकारना तथा लक्ष्मण का उसे देखना  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  6.86.9 
स सम्प्रहारस्तुमुल: संजज्ञे कपिरक्षसाम्।
शब्देन महता लङ्कां नादयन् वै समन्तत:॥ ९॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार वानरों और राक्षसों में भयंकर युद्ध होने लगा, जिसके महान् कोलाहल से समस्त लंकापुरी चारों ओर से गूंज उठी।
 
In this way a fierce battle began between the monkeys and the demons. The entire Lankapuri resounded from all sides with its great noise.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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