श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 86: वानरों और राक्षसों का युद्ध, हनुमान्जी के द्वारा राक्षस सेना का संहार और उनका इन्द्रजित को द्वन्द्वयुद्ध के लिये ललकारना तथा लक्ष्मण का उसे देखना  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  6.86.28 
सोऽभ्युपेत्य शरान् खड्गान् पट्टिशांश्च परश्वधान्।
अभ्यवर्षत दुर्धर्ष: कपिमूर्धनि राक्षस:॥ २८॥
 
 
अनुवाद
वहां पहुंचकर अजेय राक्षस ने हनुमान के सिर पर बाण, तलवार, बेल्ट और कुल्हाड़ियों की वर्षा शुरू कर दी।
 
Reaching there the invincible demon began showering arrows, swords, belts and axes on Hanuman's head.
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd