श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 85: विभीषण के अनुरोध से श्रीरामचन्द्रजी का लक्ष्मण को इन्द्रजित के वध के लिये जाने की आज्ञा देना और सेना सहित लक्ष्मण का निकुम्भिला-मन्दिर के पास पहुँचना  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  6.85.30 
विभीषणेन सहितो राजपुत्र: प्रतापवान्।
कृतस्वस्त्ययनो भ्रात्रा लक्ष्मणस्त्वरितो ययौ॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
भाई श्री राम के स्वस्तिक कहने पर, विभीषण सहित तेजस्वी राजकुमार लक्ष्मण बड़ी शीघ्रता से चले॥30॥
 
After brother Shri Ram recited the swastika, the glorious prince Lakshman along with Vibhishana moved with great haste. 30॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)