vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
»
काण्ड 6: युद्ध काण्ड
»
सर्ग 85: विभीषण के अनुरोध से श्रीरामचन्द्रजी का लक्ष्मण को इन्द्रजित के वध के लिये जाने की आज्ञा देना और सेना सहित लक्ष्मण का निकुम्भिला-मन्दिर के पास पहुँचना
»
श्लोक 24
श्लोक
6.85.24
राघवस्य वच: श्रुत्वा लक्ष्मण: सविभीषण:।
जग्राह कार्मुकश्रेष्ठमन्यद् भीमपराक्रम:॥ २४॥
अनुवाद
श्री रघुनाथजी के ये वचन सुनकर विभीषण और महापराक्रमी लक्ष्मण ने अपने-अपने उत्तम धनुष उठा लिए।
Upon hearing these words of Sri Raghunatha, Vibhishana along with the terribly valiant Lakshmana took up their best bows.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×