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श्लोक 6.84.7  |
हता इन्द्रजिता सीता इति श्रुत्वैव राघव:।
हनूमद्वचनात् सौम्य ततो मोहमुपाश्रित:॥ ७॥ |
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| अनुवाद |
| हे सज्जन! हनुमान जी से यह सुनकर कि 'इन्द्रजित ने सीता जी का हरण कर लिया है' श्री रघुनाथ जी तुरन्त ही अचेत हो गए॥7॥ |
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| Gentle! Hearing from Hanuman ji that 'Indrajit has killed Sita ji', Shri Raghunath ji immediately became unconscious. 7॥ |
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