श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 84: विभीषण का श्रीराम को इन्द्रजित की माया का रहस्य बताकर सीता के जीवित होने का विश्वास दिलाना और लक्ष्मण को सेना सहित निकुम्भिला-मन्दिर में भेजने के लिये अनुरोध करना  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  6.84.5 
व्रीडितं शोकसंतप्तं दृष्ट्वा रामं विभीषण:।
अन्तर्दु:खेन दीनात्मा किमेतदिति सोऽब्रवीत्॥ ५॥
 
 
अनुवाद
श्री रामचन्द्रजी को लज्जित और शोक से पीड़ित देखकर विभीषण का हृदय आन्तरिक शोक से भर गया। उन्होंने पूछा - 'यह क्या है?'॥5॥
 
Seeing Shri Ramchandraji ashamed and grief stricken, Vibhishan's heart was filled with inner sorrow. He asked - 'What is this?'॥ 5॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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