श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 84: विभीषण का श्रीराम को इन्द्रजित की माया का रहस्य बताकर सीता के जीवित होने का विश्वास दिलाना और लक्ष्मण को सेना सहित निकुम्भिला-मन्दिर में भेजने के लिये अनुरोध करना  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  6.84.4 
राघवं च महात्मानमिक्ष्वाकुकुलनन्दनम्।
ददर्श मोहमापन्नं लक्ष्मणस्याङ्कमाश्रितम्॥ ४॥
 
 
अनुवाद
इसके साथ ही उनकी दृष्टि इक्ष्वाकु वंश के पुत्र महात्मा श्री रघुनाथजी पर पड़ी, जो लक्ष्मण की गोद में अचेत पड़े थे।
 
Along with that his sight fell on Mahatma Sri Raghunathji, the son of the Ikshwaku clan, who was lying unconscious in Lakshmana's lap.
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas