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ramayan 6.84.3: वहां पहुंचकर उन्होंने देखा कि महात्मा लक्ष्मण शोक में डूबे हुए हैं और वानरों की आंखें भी आंसुओं से भरी हुई हैं।   |   ramayan सर्ग 6.84: विभीषण का श्रीराम को इन्द्रजित की माया का रहस्य बताकर सीता के जीवित होने का विश्वास दिलाना और लक्ष्मण को सेना सहित निकुम्भिला-मन्दिर में भेजने के लिये अनुरोध करना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 84: विभीषण का श्रीराम को इन्द्रजित की माया का रहस्य बताकर सीता के जीवित होने का विश्वास दिलाना और लक्ष्मण को सेना सहित निकुम्भिला-मन्दिर में भेजने के लिये अनुरोध करना  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  6.84.3 
सोऽभिगम्य महात्मानं राघवं शोकलालसम्।
वानरांश्चापि ददृशे बाष्पपर्याकुलेक्षणान्॥ ३॥
 
 
अनुवाद
वहां पहुंचकर उन्होंने देखा कि महात्मा लक्ष्मण शोक में डूबे हुए हैं और वानरों की आंखें भी आंसुओं से भरी हुई हैं।
 
Arriving there he saw that Mahatma Lakshman was immersed in grief and the eyes of the monkeys were also filled with tears.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)