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श्लोक 6.84.10  |
अभिप्रायं तु जानामि रावणस्य दुरात्मन:।
सीतां प्रति महाबाहो न च घातं करिष्यति॥ १०॥ |
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| अनुवाद |
| महाबाहो! मैं जानता हूँ कि दुष्ट रावण सीता के प्रति क्या भावना रखता है। वह उसे कभी नहीं मरने देगा।॥10॥ |
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| ‘Mahabaho! I know very well what the evil-minded Ravana feels for Sita. He will never let her be killed.॥ 10॥ |
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