श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 83: सीता के मारे जाने की बात सुनकर श्रीराम का शोक से मूर्च्छित होना और लक्ष्मण का उन्हें समझाते हुए पुरुषार्थ के लिये उद्यत होना  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  6.83.9 
उद‍्भ्रान्तचित्तस्तां दृष्ट्वा विषण्णोऽहमरिंदम।
तदहं भवतो वृत्तं विज्ञापयितुमागत:॥ ९॥
 
 
अनुवाद
हे शत्रुनाश करनेवाले! उसे उस अवस्था में देखकर मेरा मन व्याकुल हो गया है। मैं दुःख में डूब गया हूँ। इसीलिए मैं आपको यह समाचार सुनाने आया हूँ।॥9॥
 
O enemy-destroyer! Seeing him in that state, my mind has become distraught. I am drowned in sorrow. That is why I have come to tell you this news.'॥ 9॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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