श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 83: सीता के मारे जाने की बात सुनकर श्रीराम का शोक से मूर्च्छित होना और लक्ष्मण का उन्हें समझाते हुए पुरुषार्थ के लिये उद्यत होना  »  श्लोक 38
 
 
श्लोक  6.83.38 
यस्यार्था धर्मकामार्थास्तस्य सर्वं प्रदक्षिणम्।
अधनेनार्थकामेन नार्थ: शक्यो विचिन्वता॥ ३८॥
 
 
अनुवाद
'जिसके पास धन है, उसकी सभी धार्मिक और कामुक इच्छाएँ पूरी हो जाती हैं। उसके लिए सब कुछ अनुकूल हो जाता है। जो निर्धन है, वह चाहे धन की इच्छा करे और उसे खोजे, तो भी उसे बिना परिश्रम के प्राप्त नहीं कर सकता।' 38.
 
‘One who has wealth, all his religious and sexual desires are fulfilled. Everything becomes favorable for him. One who is poor, even if he desires wealth and searches for it, he cannot get it without hard work. 38.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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