श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 83: सीता के मारे जाने की बात सुनकर श्रीराम का शोक से मूर्च्छित होना और लक्ष्मण का उन्हें समझाते हुए पुरुषार्थ के लिये उद्यत होना  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  6.83.35 
यस्यार्थास्तस्य मित्राणि यस्यार्थास्तस्य बान्धवा:।
यस्यार्था: स पुमाँल्लोके यस्यार्था: स च पण्डित:॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
‘जिसके पास धन है, उसके मित्र अधिक होते हैं। जिसने धन संचय कर लिया है, उसके सभी भाई और मित्र हो जाते हैं। जिसके पास पर्याप्त धन है, वही संसार में श्रेष्ठ मनुष्य कहलाता है और जिसके पास धन है, वही विद्वान माना जाता है।॥35॥
 
‘The one who has wealth has more friends. The one who has accumulated wealth, everyone becomes his brother and friend. The one who has enough wealth is called the best man in the world and the one who has wealth is considered a scholar.॥ 35॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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