श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 83: सीता के मारे जाने की बात सुनकर श्रीराम का शोक से मूर्च्छित होना और लक्ष्मण का उन्हें समझाते हुए पुरुषार्थ के लिये उद्यत होना  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  6.83.3 
तद् गच्छ कुरु साहाय्यं स्वबलेनाभिसंवृत:।
क्षिप्रमृक्षपते तस्य कपिश्रेष्ठस्य युध्यत:॥ ३॥
 
 
अनुवाद
"अतः हे रीछराज! आप अपनी सेना के साथ शीघ्रता से जाइये और वानरों में श्रेष्ठ, युद्धरत हनुमान की सहायता कीजिये।"
 
"Therefore, O King of the Bears! You go quickly with your army and help the fighting Hanuman, the best of the apes."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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