श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 83: सीता के मारे जाने की बात सुनकर श्रीराम का शोक से मूर्च्छित होना और लक्ष्मण का उन्हें समझाते हुए पुरुषार्थ के लिये उद्यत होना  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  6.83.24 
अदृष्टप्रतिकारेण अव्यक्तेनासता सता।
कथं शक्यं परं प्राप्तुं धर्मेणारिविकर्षण॥ २४॥
 
 
अनुवाद
शत्रुसूदन! जो धर्म चेतन नहीं है, अव्यक्त है और असत् के समान विद्यमान है, उस धर्म द्वारा दूसरे (पापी जीव) को मारना कैसे संभव है?॥ 24॥
 
Shatrusudan! How is it possible to kill another (sinful soul) by that Dharma which is devoid of the knowledge of countermeasures because it is not conscious, is unmanifest and exists like the unreal?॥ 24॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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