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श्लोक 6.83.10  |
तस्य तद् वचनं श्रुत्वा राघव: शोकमूर्च्छित:।
निपपात तदा भूमौ छिन्नमूल इव द्रुम:॥ १०॥ |
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| अनुवाद |
| हनुमान के ये शब्द सुनकर भगवान राम शोक से अचेत हो गए और तुरंत जड़ से कटे वृक्ष की भाँति भूमि पर गिर पड़े। |
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| On hearing these words from Hanuman, Lord Rama became unconscious with grief and instantly fell on the ground like a tree cut from its roots. |
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