श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 83: सीता के मारे जाने की बात सुनकर श्रीराम का शोक से मूर्च्छित होना और लक्ष्मण का उन्हें समझाते हुए पुरुषार्थ के लिये उद्यत होना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  6.83.1 
राघवश्चापि विपुलं तं राक्षसवनौकसाम्।
श्रुत्वा संग्रामनिर्घोषं जाम्बवन्तमुवाच ह॥ १॥
 
 
अनुवाद
भगवान् श्री राम ने भी राक्षसों और वानरों की वह महान युद्ध-घोषणा सुनी और जाम्बवान से कहा-॥1॥
 
Lord Shri Ram also heard that great war cry of demons and monkeys and said to Jambavan -॥ 1॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd