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ramayan 6.82.5: जब बुद्धिमान वायुपुत्र ने ऐसा कहा, तब वानर प्रसन्न हो गए और राक्षसों पर अत्यन्त क्रोधित होकर उन्होंने पर्वत शिखरों और वृक्षों को हाथ में उठा लिया॥5॥   |   ramayan सर्ग 6.82: हनुमान्जी के नेतृत्व में वानरों और निशाचरों का युद्ध, हनुमान्जी का श्रीराम के पास लौटना और इन्द्रजित का निकुम्भिला-मन्दिर में जाकर होम करना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 82: हनुमान्जी के नेतृत्व में वानरों और निशाचरों का युद्ध, हनुमान्जी का श्रीराम के पास लौटना और इन्द्रजित का निकुम्भिला-मन्दिर में जाकर होम करना  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  6.82.5 
एवमुक्ता: सुसंक्रुद्धा वायुपुत्रेण धीमता।
शैलशृङ्गान् द्रुमांश्चैव जगृहुर्हृष्टमानसा:॥ ५॥
 
 
अनुवाद
जब बुद्धिमान वायुपुत्र ने ऐसा कहा, तब वानर प्रसन्न हो गए और राक्षसों पर अत्यन्त क्रोधित होकर उन्होंने पर्वत शिखरों और वृक्षों को हाथ में उठा लिया॥5॥
 
When the wise son of Vayu said this, the monkeys became happy and being very angry towards the demons, they picked up the mountain peaks and trees in their hands. 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)