श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 80: रावण की आज्ञा से इन्द्रजित का घोर युद्ध तथा उसके वध के विषयमें श्रीराम और लक्ष्मण की बातचीत  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  6.80.5 
तथोक्तो राक्षसेन्द्रेण प्रतिगृह्य पितुर्वच:।
यज्ञभूमौ स विधिवत् पावकं जुहुवेन्द्रजित्॥ ५॥
 
 
अनुवाद
राक्षसराज रावण की यह बात सुनकर इन्द्रजित् ने पिता की आज्ञा मानकर यज्ञभूमि में जाकर अग्नि प्रज्वलित की और उसमें हवन किया॥5॥
 
On hearing this from the demon king Ravana, Indrajit obeyed his father's orders and went to the sacrificial ground, lit the fire and performed the ritualistic havan in it. 5॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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