श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 80: रावण की आज्ञा से इन्द्रजित का घोर युद्ध तथा उसके वध के विषयमें श्रीराम और लक्ष्मण की बातचीत  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  6.80.4 
त्वमप्रतिमकर्माणमिन्द्रं जयसि संयुगे।
किं पुनर्मानुषौ दृष्ट्वा न वधिष्यसि संयुगे॥ ४॥
 
 
अनुवाद
आप युद्ध में अतुलनीय पराक्रम वाले इन्द्र को भी परास्त कर देते हैं; फिर जब वे दोनों पुरुष युद्धभूमि में आपके सामने हैं, तब आप उन्हें क्यों नहीं मार सकते?॥4॥
 
You defeat even Indra in battle, whose prowess is unmatched; then why can't you kill those two men when you find them in front of you on the battlefield?'॥ 4॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd