श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 80: रावण की आज्ञा से इन्द्रजित का घोर युद्ध तथा उसके वध के विषयमें श्रीराम और लक्ष्मण की बातचीत  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  6.80.33 
रावणिस्तु दिश: सर्वा रथेनातिरथोऽपतत्।
विव्याध तौ दाशरथी लघ्वस्त्रो निशितै: शरै:॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
रावण का पुत्र इन्द्रजित, जो अत्यन्त वीर सारथी था, अपने रथ पर सवार होकर चारों दिशाओं में दौड़ता हुआ बड़ी फुर्ती से अस्त्र-शस्त्र चलाता हुआ चला आ रहा था। उसने अपने तीखे बाणों से दशरथ के दोनों पुत्रों को घायल कर दिया।
 
Indrajit, the son of Ravana, a very brave charioteer, raced in all directions in his chariot and used to shoot his weapons with great agility. He wounded both the sons of Dasharath with his sharp arrows.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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