श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 80: रावण की आज्ञा से इन्द्रजित का घोर युद्ध तथा उसके वध के विषयमें श्रीराम और लक्ष्मण की बातचीत  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  6.80.32 
यतो हि ददृशाते तौ शरान् निपतिताञ्छितान्।
ततस्तु तौ दाशरथी ससृजातेऽस्त्रमुत्तमम्॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
जिस ओर से तीखे बाण आते दिखाई देते, उसी ओर दशरथ के पुत्र श्री राम और लक्ष्मण दोनों भाई अपने उत्तम अस्त्र छोड़ देते थे॥32॥
 
From whichever direction the sharp arrows were seen coming, in that direction both the brothers, Sri Rama and Lakshmana, the sons of Dasharatha, used to shoot their best weapons. ॥ 32॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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