श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 80: रावण की आज्ञा से इन्द्रजित का घोर युद्ध तथा उसके वध के विषयमें श्रीराम और लक्ष्मण की बातचीत  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  6.80.28 
स रामं सूर्यसंकाशै: शरैर्दत्तवरैर्भृशम्।
विव्याध समरे क्रुद्ध: सर्वगात्रेषु रावणि:॥ २८॥
 
 
अनुवाद
उस रावणकुमार ने समरांगण में कुपित होकर वरदान स्वरूप सूर्य के समान तेजस्वी बाणों द्वारा श्री रामचन्द्रजी के शरीर के समस्त अंगों को घायल कर दिया॥28॥
 
That Ravana Kumar, enraged in the battle of Samarangaan, wounded all the body parts of Shri Ramchandraji with the arrows which were as bright as the sun as a boon. 28॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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