श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 80: रावण की आज्ञा से इन्द्रजित का घोर युद्ध तथा उसके वध के विषयमें श्रीराम और लक्ष्मण की बातचीत  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  6.80.18 
अद्य निर्वानरामुर्वीं हत्वा रामं च लक्ष्मणम्।
करिष्ये परमां प्रीतिमित्युक्त्वान्तरधीयत॥ १८॥
 
 
अनुवाद
आज मैं राम और लक्ष्मण को मारकर तथा पृथ्वी को वानरों से रहित करके अपने पिता को परम संतोष प्रदान करूँगा।’ ऐसा कहकर वे अंतर्ध्यान हो गए॥18॥
 
Today, by killing Rama and Lakshmana and making the earth desolate of monkeys, I shall give my father immense satisfaction.' Saying this, he disappeared.॥ 18॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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