श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 8: प्रहस्त, दुर्मुख, वज्रदंष्ट, निकुम्भ और वज्रहनु का रावण के सामने शत्रु-सेना को मार गिराने का उत्साह दिखाना  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  6.8.5 
रक्षां चैव विधास्यामि वानराद् रजनीचर।
नागमिष्यति ते दु:खं किंचिदात्मापराधजम्॥ ५॥
 
 
अनुवाद
हे दैत्यराज! मैं समस्त वानरों से आपकी रक्षा करूँगा; इसलिए आपके द्वारा किए गए सीताहरण के अपराध के कारण आपको कोई हानि नहीं होगी।॥5॥
 
King of demons! I will protect you from all the monkeys; therefore, no harm will come to you due to the crime of abducting Sita that you have committed.' ॥ 5॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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