| श्रीमद् वाल्मीकि रामायण » काण्ड 6: युद्ध काण्ड » सर्ग 8: प्रहस्त, दुर्मुख, वज्रदंष्ट, निकुम्भ और वज्रहनु का रावण के सामने शत्रु-सेना को मार गिराने का उत्साह दिखाना » श्लोक 4 |
|
| | | | श्लोक 6.8.4  | सर्वां सागरपर्यन्तां सशैलवनकाननाम्।
करोम्यवानरां भूमिमाज्ञापयतु मां भवान्॥ ४॥ | | | | | | अनुवाद | | 'यदि आपकी आज्ञा हो तो मैं समुद्र पर्यन्त सम्पूर्ण भूमि को, पर्वतों, वनों और जंगलों सहित, वानरों के लिए उजाड़ कर दूँ। | | | | ‘If you permit, I will make the entire land up to the sea, including the mountains, forests and jungles, desolate for the monkeys. | | ✨ ai-generated | | |
|
|