श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 8: प्रहस्त, दुर्मुख, वज्रदंष्ट, निकुम्भ और वज्रहनु का रावण के सामने शत्रु-सेना को मार गिराने का उत्साह दिखाना  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  6.8.3 
सर्वे प्रमत्ता विश्वस्ता वञ्चिता: स्म हनूमता।
नहि मे जीवतो गच्छेज्जीवन् स वनगोचर:॥ ३॥
 
 
अनुवाद
पहले हम निश्चिंत थे। हमें शत्रुओं का कोई भय नहीं था। इसीलिए हम निश्चिंत बैठे थे। यही कारण है कि हनुमान ने हमें धोखा दिया। अन्यथा वह वानर मेरे रहते यहाँ से जीवित नहीं जा सकता था॥3॥
 
‘Earlier we were careless. We had no fear of enemies. That is why we were sitting carefree. This is the reason why Hanuman deceived us. Otherwise that monkey could not have left this place alive as long as I was alive.॥ 3॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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