श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 8: प्रहस्त, दुर्मुख, वज्रदंष्ट, निकुम्भ और वज्रहनु का रावण के सामने शत्रु-सेना को मार गिराने का उत्साह दिखाना  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  6.8.17 
आकाशे गणश: स्थित्वा हत्वा तां हरिवाहिनीम्।
अश्मशस्त्रमहावृष्टॺा प्रापयाम यमक्षयम्॥ १७॥
 
 
अनुवाद
‘फिर तुम आकाश में बड़े समूह में खड़े होकर वानर सेना पर पत्थरों और अस्त्रों की भारी वर्षा करके उन्हें यमलोक भेज दो॥17॥
 
‘Then stand in the sky in a large group and shower a heavy shower of stones and weapons on the monkey army and send them to Yamaloka.॥ 17॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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