श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 8: प्रहस्त, दुर्मुख, वज्रदंष्ट, निकुम्भ और वज्रहनु का रावण के सामने शत्रु-सेना को मार गिराने का उत्साह दिखाना  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  6.8.16 
ततो वयमितस्तूर्णं शूलशक्तिगदाधरा:।
चापबाणासिहस्ताश्च त्वरितास्तत्र यामहे॥ १६॥
 
 
अनुवाद
उसके बाद हम लोग शूल, शक्ति, गदा, धनुष, बाण और तलवार से सुसज्जित होकर यहाँ से मार्ग में शीघ्र ही उसके पास पहुँचेंगे॥16॥
 
After that, we will quickly reach him on the way from here armed with spike, power, mace, bow, arrows and sword. 16॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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