| श्रीमद् वाल्मीकि रामायण » काण्ड 6: युद्ध काण्ड » सर्ग 79: श्रीरामचन्द्रजी के द्वारा मकराक्ष का वध » श्लोक 37 |
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| | | | श्लोक 6.79.37  | तं दृष्ट्वा निहतं शूलं मकराक्षो निशाचर:।
मुष्टिमुद्यम्य काकुत्स्थं तिष्ठ तिष्ठेति चाब्रवीत्॥ ३७॥ | | | | | | अनुवाद | | उस भाले को टुकड़े-टुकड़े हुआ देखकर रात्रि राक्षस मकराक्ष ने अपनी मुट्ठी तानकर श्री राम से कहा, "अरे! रुक जाओ, रुक जाओ।" | | | | Seeing that spear broken into pieces, the night demon Makaraaksha raised his fist and said to Sri Rama, "Hey! Stand still, stand still." | | ✨ ai-generated | | |
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