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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 78: रावण की आज्ञा से मकराक्ष का युद्ध के लिये पत्र थान  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  6.78.2 
नैर्ऋत: क्रोधशोकाभ्यां द्वाभ्यां तु परिमूर्च्छित:।
खरपुत्रं विशालाक्षं मकराक्षमचोदयत्॥ २॥
 
 
अनुवाद
क्रोध और शोक से व्याकुल रावण ने खर के पुत्र मकराक्ष से, जिसके बड़े-बड़े नेत्र थे, कहा:
 
Ravana, distraught with anger and grief, said to Makaraksha, the son of Khara, who had large eyes:
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)