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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 78: रावण की आज्ञा से मकराक्ष का युद्ध के लिये पत्र थान  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  6.78.18 
तस्य ते रथसंयुक्ता हया विक्रमवर्जिता:।
चरणैराकुलैर्गत्वा दीना: सास्रमुखा ययु:॥ १८॥
 
 
अनुवाद
उसके रथ में जुते घोड़ों का कौशल खत्म हो गया था - वे अपनी अजीबोगरीब चालें भूल गए थे। पहले तो वे बेचैन और लड़खड़ाते पैरों से कुछ दूर चले; फिर ठीक से चलने लगे। लेकिन अंदर ही अंदर वे बहुत उदास थे। उनके चेहरों पर आँसू बह रहे थे।
 
The horses harnessed to his chariot lost their skill - they forgot their various strange gaits. At first they walked a little distance with restless and staggering feet; then they started walking properly. But inside they were very sad. Tears were flowing down their faces.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)