| श्रीमद् वाल्मीकि रामायण » काण्ड 6: युद्ध काण्ड » सर्ग 77: हनुमान् के द्वारा निकुम्भ का वध » श्लोक 8 |
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| | | | श्लोक 6.77.8  | नगर्या विटपावत्या गन्धर्वभवनोत्तमै:।
सतारागणनक्षत्रं सचन्द्रसमहाग्रहम्।
निकुम्भपरिघाघूर्णं भ्रमतीव नभस्थलम्॥ ८॥ | | | | | | अनुवाद | | निकुम्भ के चारों ओर परिक्रमा करके विट्पावती (अलकापुरी) नगरी, गन्धर्वों के सुन्दर महल, तारे, नक्षत्र, चन्द्रमा और बड़े-बड़े ग्रह सहित सम्पूर्ण आकाश घूमता हुआ प्रतीत हो रहा था॥8॥ | | | | By revolving around Nikumbh, the entire sky seemed to be rotating along with the city of Vitpavati (Alkapuri), the beautiful palaces of the Gandharvas, the stars, the constellations, the moon and the big planets. 8॥ | | ✨ ai-generated | | |
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