श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 77: हनुमान् के द्वारा निकुम्भ का वध  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  6.77.7 
परिघाग्रेण पुस्फोट वातग्रन्थिर्महात्मन:।
प्रजज्वाल सघोषश्च विधूम इव पावक:॥ ७॥
 
 
अनुवाद
उस विशाल राक्षस की परिधि के अग्रभाग पर आघात करते ही प्रवाह, आवाह आदि सात महान वायुओं का संधि-बंध टूट गया और वह घोर गर्जना के साथ धूमरहित अग्नि के समान प्रज्वलित होने लगा ॥7॥
 
On striking the front part of the perimeter of that gigantic demon, the junction of the seven great winds like Pravaha, Aavaha etc. broke and along with a loud thunder it started blazing like a smokeless fire. ॥7॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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