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श्लोक 6.77.10  |
राक्षसा वानराश्चापि न शेकु: स्पन्दितुं भयात्।
हनुमांस्तु विवृत्योरस्तस्थौ प्रमुखतो बली॥ १०॥ |
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| अनुवाद |
| उस समय राक्षस और वानर इतने भयभीत हो गए कि हिल भी नहीं सकते थे। केवल महाबली हनुमान ही छाती फाड़े राक्षस के सामने खड़े थे॥10॥ |
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| At that time the demons and the monkeys were so afraid that they could not even move. Only the mighty Hanuman stood before the demon with his chest open.॥10॥ |
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