श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 77: हनुमान् के द्वारा निकुम्भ का वध  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  6.77.1 
निकुम्भो भ्रातरं दृष्ट्वा सुग्रीवेण निपातितम्।
प्रदहन्निव कोपेन वानरेन्द्रमुदैक्षत॥ १॥
 
 
अनुवाद
जब निकुंभ ने अपने भाई कुंभ को सुग्रीव के हाथों मारा हुआ देखा तो उसने वानरराज की ओर ऐसे देखा जैसे वह उसे अपने क्रोध से जलाकर भस्म कर देगा।
 
When Nikumbha saw his brother Kumbha being killed by Sugreeva, he looked at the monkey king as if he would burn him to ashes with his anger.
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas