श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 76: अङ्गद के द्वारा कम्पन और प्रजङ्घका द्विविद के द्वारा शोणिताक्षका, मैन्द के द्वारा यूपाक्षका और सुग्रीव के द्वारा कुम्भ का वध  »  श्लोक 92
 
 
श्लोक  6.76.92 
मुष्टिनाभिहतस्तेन निपपाताशु राक्षस:।
लोहिताङ्ग इवाकाशाद् दीप्तरश्मिर्यदृच्छया॥ ९२॥
 
 
अनुवाद
सुग्रीव के मुक्के का आघात पाकर वह राक्षस उसी समय गिर पड़ा, मानो मंगल ग्रह आकाश से अचानक गिर पड़ा हो ॥92॥
 
Being hit by Sugriva's fist, that demon immediately collapsed like Mars suddenly falling from the sky. 92॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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