श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 76: अङ्गद के द्वारा कम्पन और प्रजङ्घका द्विविद के द्वारा शोणिताक्षका, मैन्द के द्वारा यूपाक्षका और सुग्रीव के द्वारा कुम्भ का वध  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  6.76.8 
शोणिताक्षस्तत: क्षिप्रमसिचर्म समाददे।
उत्पपात तदा क्रुद्धो वेगवानविचारयन्॥ ८॥
 
 
अनुवाद
तदनन्तर वेगवान रात्रिवीर शोणितक्ष ने क्रोधित होकर तुरन्त ही ढाल और तलवार हाथ में ले ली और बिना विचारे ही रथ से कूद पड़ा॥8॥
 
Thereafter, Shonitaksha, the swift nocturnal warrior, got angry and immediately took the shield and sword in his hands and without thinking, he jumped from the chariot. 8॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)