श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 76: अङ्गद के द्वारा कम्पन और प्रजङ्घका द्विविद के द्वारा शोणिताक्षका, मैन्द के द्वारा यूपाक्षका और सुग्रीव के द्वारा कुम्भ का वध  »  श्लोक 79
 
 
श्लोक  6.76.79 
उपालम्भभयाच्चैव नासि वीर मया हत:।
कृतकर्मपरिश्रान्तो विश्रान्त: पश्य मे बलम्॥ ७९॥
 
 
अनुवाद
वीर! मैंने अब तक तुम्हें नहीं मारा, इसका कारण लोक-निंदा का भय है। लोग मेरी निन्दा करते कि कुम्भ अनेक वीर योद्धाओं से युद्ध करके थक गया है और सुग्रीव ने उसी अवस्था में उसे मार डाला; अतः अब तुम कुछ विश्राम करो और फिर मेरा पराक्रम देखो॥ 79॥
 
Valiant! The reason I have not killed you till now is the fear of people's reproach. People would have slandered me saying that Kumbha was tired after fighting with many brave warriors and Sugreeva killed him in that condition; so now you take some rest and then see my strength.'॥ 79॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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