श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 76: अङ्गद के द्वारा कम्पन और प्रजङ्घका द्विविद के द्वारा शोणिताक्षका, मैन्द के द्वारा यूपाक्षका और सुग्रीव के द्वारा कुम्भ का वध  »  श्लोक 39
 
 
श्लोक  6.76.39 
स धनुर्धन्विनां श्रेष्ठ: प्रगृह्य सुसमाहित:।
मुमोचाशीविषप्रख्याञ्छरान् देहविदारणान्॥ ३९॥
 
 
अनुवाद
वह धनुर्धरों में श्रेष्ठ था और युद्ध में अपने मन को अत्यन्त एकाग्र रखता था। उसने धनुष उठाया और शरीर को छेदने वाले तथा सर्प के समान विषैले बाणों की वर्षा करने लगा। 39.
 
He was the best among archers and kept his mind very focused in battle. He picked up the bow and started showering arrows capable of piercing the body and poisonous like a snake. 39.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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