श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 76: अङ्गद के द्वारा कम्पन और प्रजङ्घका द्विविद के द्वारा शोणिताक्षका, मैन्द के द्वारा यूपाक्षका और सुग्रीव के द्वारा कुम्भ का वध  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  6.76.15 
तयोर्मध्ये कपिश्रेष्ठ: शोणिताक्षप्रजङ्घयो:।
विशाखयोर्मध्यगत: पूर्णचन्द्र इवाबभौ॥ १५॥
 
 
अनुवाद
शोणितक्ष और प्रजंघ नामक दैत्यों में श्रेष्ठ अंगद उसी प्रकार शोभा पा रहे थे, जैसे दो विशाखा नक्षत्रों के बीच पूर्ण चन्द्रमा सुशोभित होता है।
 
Angada, the best among the demons Shonitaksha and Prajngha, was enjoying the same beauty as the full moon is adorned between the two Vishakha constellations.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)