| श्रीमद् वाल्मीकि रामायण » काण्ड 6: युद्ध काण्ड » सर्ग 75: लङ्कापुरी का दहन तथा राक्षसों और वानरों का भयंकर युद्ध » श्लोक 9 |
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| | | | श्लोक 6.75.9  | क्षौमं च दह्यते तत्र कौशेयं चापि शोभनम्।
आविकं विविधं चौर्णं काञ्चनं भाण्डमायुधम्॥ ९॥ | | | | | | अनुवाद | | वहाँ क्षौम (सन या भांग से बना वस्त्र) भी जल रहा था, सुन्दर रेशमी वस्त्र भी जल रहे थे। भेड़ के ऊन से बने कम्बल, नाना प्रकार के ऊनी वस्त्र, स्वर्ण के आभूषण और हथियार भी जल रहे थे॥9॥ | | | | There, Kshauma (cloth made of flax or hemp fibres) was also burning and so were beautiful silk clothes. Blankets made of sheep wool, woollen clothes of various kinds, gold ornaments and weapons were also burning.॥ 9॥ | | ✨ ai-generated | | |
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