vedamrit
Reset
Home
ग्रन्थ
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
श्रीमद् भगवद गीता
______________
श्री विष्णु पुराण
श्रीमद् भागवतम
______________
श्रीचैतन्य भागवत
वैष्णव भजन
About
Contact
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
»
काण्ड 6: युद्ध काण्ड
»
सर्ग 75: लङ्कापुरी का दहन तथा राक्षसों और वानरों का भयंकर युद्ध
»
श्लोक 8
श्लोक
6.75.8
अगुरुर्दह्यते तत्र परं चैव सुचन्दनम्।
मौक्तिका मणय: स्निग्धा वज्रं चापि प्रवालकम्॥ ८॥
अनुवाद
कहीं अगुरु जल रहा था, तो कहीं उत्तम चंदन। मोती, बहुमूल्य रत्न, हीरे और मूंगे भी जल रहे थे।
Somewhere aguru was burning and somewhere else the finest sandalwood. Pearls, precious stones, diamonds and corals were also burning.
✨ ai-generated
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas