| श्रीमद् वाल्मीकि रामायण » काण्ड 6: युद्ध काण्ड » सर्ग 75: लङ्कापुरी का दहन तथा राक्षसों और वानरों का भयंकर युद्ध » श्लोक 67-69h |
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| | | | श्लोक 6.75.67-69h  | विप्रलम्भितशस्त्रं च विमुक्तकवचायुधम्।
समुद्यतमहाप्रासं मुष्टिशूलासिकुन्तलम्॥ ६७॥
प्रावर्तत महारौद्रं युद्धं वानररक्षसाम्।
वानरान् दश सप्तेति राक्षसा जघ्नुराहवे॥ ६८॥
राक्षसान् दश सप्तेति वानराश्चाभ्यपातयन्। | | | | | | अनुवाद | | उस समय वानरों और राक्षसों में भयंकर युद्ध छिड़ गया। अस्त्र-शस्त्र गिर पड़ते, कवच-शस्त्र नष्ट हो जाते, बड़े-बड़े भाले ऊँचे उठे हुए दिखाई देते और मुक्कों, भालों, तलवारों और बरछियों के प्रहार होने लगते। उस युद्धभूमि में राक्षस एक बार में दस-सात वानरों को मार डालते और वानर भी एक बार में दस-सात राक्षसों को मार डालते। 67-68 1/2। | | | | At that time a fierce battle started between the monkeys and the demons. Weapons would fall, armour and weapons would be lost, large spears would be seen raised high and there would be blows of fists, spears, swords and spears. In that battlefield the demons would kill ten or seven monkeys at a time and the monkeys would also kill ten or seven demons at a time. 67-68 1/2. | | ✨ ai-generated | | |
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